नर्मदा:-

यह पवित्र जल वाली नर्मदा जीवनदायिनी नदी है इसे रेवा और मेकलसुता के नामों से भी जाना जाता है इसके दोनों किनारों पर अनेक तीर्थस्थान और तपस्वियों के आश्रम है प्राचीनकाल से ही इसके पवित्र किनारों पर तपस्वियों के सिद्ध स्थल है इसलिए लोग नर्मदा की परिक्रमा करके अपने को धन्य और पवित्र मानते यंहा का प्राकृतिक सौन्दर्य भी देखने योग्य हैं
अनूपपुर मण्डल में अमरकंटक नामक पर्वत है वहां से ही नर्मदा निकलती है उसके बाद यह घने वनों और ऊँचे पर्वतों पर भ्रमण करती हुई डिण्डोरी मण्डल में प्रवेश करती है डिण्डोरी से सर्पाकार गति से ऊँचें-नीचे मार्ग से महाराजपुर पहुँचती है वहां से जबलपुर आती है संगमरमर की चट्टानों के लिए अति प्रसिद्ध भेडाघाट नाम के स्थान पर धुँआधार झरने का रूप धरती है इसे देखने के लिए बहुत से पर्यटक यहाँ आते है
जब यह जबलपुर से ब्रह्माण्डघाट पर आती है वहाँ से प्रवेश करती हुई यह होशंगाबाद में नगर में प्रवेश करती है यहाँ का सेठानीघाट स्थान प्रसिद्ध है इस नगर में इसके किनारे अनेक मंदिर और आश्रम है यहाँ भक्तो के द्वारा की गई प्रार्थना और घंटो का स्वर रात दिन सुनाई देता है वहां से वेग वाली यह नदी ओंकारेश्वर नगर को छूती है यहाँ ममलेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग की आराधना करती हुई ओंकार के सामान आकृति धारण करती है यही पर आदि शंकराचार्य के गुरु गोविन्दाचार्य का भी पवित्र स्थान है
मण्डलेश्वर नगर से महारानी अहिल्या के द्वारा सेवित माहिष्मती (महेश्वर) नगर में इसका अति विस्तृत रूप दिखाई देता है बाद में खलघाट शूलपाणेश्वर आदि स्थानों को सींचती हुई गुजरात प्रान्त के भरूच नगर के पास अरब सागर में विलीन हो जाती है नर्मदा नदी पर ही बरगी, इंदिरासागर, सरदार सरोवर आदि बहुत से बांध निर्मित है जितने बांध नर्मदा नदी पर है उतने बांध अन्य नदियों पर नहीं है कालिदास ने भी मेघदूत में इसके सौन्दर्य का वर्णन किया है